Thursday, 5 December 2013

कामकाजी महिलाओं के लिए सर्दियों का टाइम मैनेजमेंट



सर्दियों का सुहावना मौसम सभी को बहुत लुभाता है, पर इसमें सबसे बडी मुश्किल यह होती है कि दिन बेहद छोटे होते हैं. इससे हमारी दिनचर्या बहुत ज्यादा प्रभावित होती है. ऐसे में कामकाजी महिलाओं के लिए सही ढंग से समय प्रबंधन करना किसी चुनौती से कम नहीं होता. आखिरकार उन्हें ऑफिस से लेकर घर तक की सारी जिम्मेदारियां जो निभानी होती हैं. तो आइये जानने की सर्दियों के मौसम में आप कम समय में काम को कैसे मैनेज करें-

टाइम मैनेजमेंट टिप्स

 1. सुबह आपको देर ना हो इसलिए रात को ही अगले दिन की सारी तैयारी करके रख लें. 

2. पति, बच्चों और खुद के पहनने वाले कपड़े प्रेस करके वार्डरोब में बिलकुल सामने हैंगर में लगाकर रखें. इसके अलावा शूज-सॉक्स, अंडरगारमेंट्स और टॉवल आदि भी रात को ही व्यवस्थित कर लें. 

3. छुट्टी वाले दिन के लिए ज़रूरी कामों की लिस्ट पहले ही बना लें. उस रोज़ अपने सारे काम जल्दी खत्म करने की कोशिश करें. 

 4. अगर किसी से मिलने जाना है तो उसके लिए सुबह का समय निर्धारित करें. 

 5. आज क्या बनेगा सोचने में व्यर्थ समय ना गवाएं. अगर आप चाहें तो इस समस्या से बचने के लिए परिवार के सभी सदस्यों की पसंद का ध्यान में रखते हुए पूरे हफ्ते का मेन्यू तैयार करके उसे किचन में चिपका सकती हैं. इससे आपके लिए खाना बनाना आसान हो जाएगा. 

 6. बच्चे सुबह उठने में देर लगाते हैं, इसलिए रात को उन्हें नौ बजे तक सुला दें और सुबह थोड़ा पहले से ही जगाना शुरू कर दें.




Monday, 2 December 2013

ऑपरेशन के बाद मां की कैसी होनी चाहिये देखभाल



आपको जानकर आश्‍चर्य होगा कि आज भी प्रसवोत्‍तर मातृ मृत्‍यु दर सबसे अधिक है। इस अवधि में महिला को अपने पार्टनर और घर वालों से बातचीत करना चाहिए कि उसे आराम की सख्‍त जरूरत है और परिवारीजनों को भी उसका साथ देना चाहिए ताकि वह शारीरिक और भावनात्‍मक रूप से मजबूत हो सकें। प्रसव के बाद, महिला का शरीर निचुड जाता है, उसके शरीर को दुबारा ताकतवर बनने में समय लग जाता है और ऑपरेशन में यह स्थिति ज्‍यादा गंभीर हो जाती है। ऑपरेशन के बाद लगातार डॉक्‍टर से सम्‍पर्क में बने रहें ताकि वह जल्‍दी से जल्‍दी स्‍वस्‍थ हो पाएं। 

ऑपरेशन से हुए प्रसव के बाद कुछ स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल टिप्‍स निम्‍म प्रकार हैं :

 स्‍टेप : 1 यहां कुछ टिप्‍स दिए जा रहे है जो आपको बच्‍चे के जन्‍म के बाद हॉस्पिटल छोड़ने से पहले ध्‍यान में रखना चाहिए। 

1) ऑपरेशन होने के बाद डॉक्‍टरी सलाह के अनुसार आप धीमे और कम चलें। जहां भी जाना हो, हल्‍के - हल्‍के कदम बढ़ाएं। 

2) डॉक्‍टर की सभी सलाह को ध्‍यान से सुन लें। आप चाहें तो डॉक्‍टर से इसके साइड इफेक्‍ट और बच्‍चे पर होने वाले असर के बारे में भी पूछ सकती हैं। अपने डाइट प्‍लान के बारे में भी सलाह ले लें। 

3) डिलीवरी के बाद लगभग 6 सप्‍ताह तक लगातार ब्‍लीडिंग होती है, इस दौरान आप लगातार पैड चेंज करती रहें, वरना इंफेक्‍शन होने का खतरा रहता है। वैसे हॉस्पिटल पैड देते है लेकिन अगर ऐसी सुविधा नहीं है तो खुद प्रबंध कर लें। 

4) अगर आप बैठना पसंद करती है तो रॉकिंग चेयर पर कुछ समय बिताएं, इससे काफी जल्‍दी रिकवरी होती है और आपको दर्द से भी निजात मिलेगा। 


स्‍टेप : 2 - हॉस्पिटल से घर आने के बाद इन टिप्‍स पर ध्‍यान दें। 

1) धीमे चलें। भारी वजन उठाने की कोशिश न करें। कम से कम 6 सप्‍ताह तक कोई भारी वजन नहीं उठाएं, वरना टांके फूलने और उनमें दर्द होने का ड़र रहता है। अपने स्‍वास्‍थ्‍य पर ध्‍यान दें। 

2) पर्याप्‍त मात्रा में पानी पिएं। अपनी बॉडी को डिहाइड्रेट होने से बचाएं। ज्‍यादा पानी पीने से कब्‍ज की समस्‍या नहीं होती है जिससे आराम रहता है। 

3) घर में ही थोड़ा - थोड़ा टहलें। 

4) ऑपरेशन के बाद बुखार आने पर डॉक्‍टर को दिखा लें। अगर आपको टांकों में भी कोई दर्द होता है तब भी डॉक्‍टर को दिखाएं। 

5) टांकों को कटने तक भीगने से बचाएं। नहाते समय उन पर पानी न पड़ने दें। 

6) ऑपरेशन के 4 सप्‍ताह तक ड्राईविंग करने से बचें। 

7) ऑपरेशन होने के कुछ सप्‍ताह बाद तक सेक्‍स करने से बचें। इस दौरान बच्‍चे को ज्‍यादा से ज्‍यादा समय दें और उसके साथ एक इमोशनल बॉन्‍ड बनाएं। इस तरह आपको भी अच्‍छा लगेगा।




क्‍या आप दूसरे बच्‍चे के लिए तैयार हैं ?



घर में किसी नए सदस्‍य का आना, अपने साथ हजारों खुशियां लाता है। याद है जब आपका पहला बेबी हुआ था, तो घर में सभी लोग बहुत खुश थे, जश्‍न वाला माहौल था। आप जब दूसरे बेबी को जन्‍म देगी तब भी सभी की खुशी का ठिकाना नहीं रहेगा। लेकिन क्‍या आप वाकई में दूसरे बच्‍चे को जन्‍म देने के लिए तैयार हैं। एक बच्‍चे के जन्‍म में पूरे परिवार की राजी, पार्टनर की हामी और पहले बच्‍चे की समझ को बढ़ाना जरूरी होता है। कई बार दूसरे बच्‍चे के जन्‍म के समय पहले बच्‍चे को बहुत तकलीफ होती है क्‍योंकि वह मानसिक रूप से दूसरे भाई/बहन के साथ अपने मम्‍मी - पापा का प्‍यार बांटने के लिए तैयार नहीं होता है। ऐसे में उसे इमोशनली डील करना पड़ता है। वहीं दूसरी बार प्रेग्‍नेंट होने पर आपको घर और बच्‍चे की जिम्‍मेदारी भी किसी को सौपनीं पड़ती है। डिलीवरी के बाद आपको दो बच्‍चों की देखभाल करनी पड़ती है। ऐसे में आपको ज्‍यादा वर्कआउट करना पड़ता है। दूसरे बच्‍चे के लिए प्‍लानिंग करने से पहले हसबैंड और वाइफ को निम्‍म बातों को ध्‍यान में रखना चाहिए :

 - क्‍या आप दूसरे बच्‍चे के लिए तैयार हैं ?

 1) पहले बच्‍चे के सामान को निकाल लें : जब आप दूसरे बच्‍चे की तैयारी में हों, तो पहले बच्‍चे के जन्‍म के दौरान लाया सामान और कपड़ों को निकाल लें और उन्‍हे साफ करके रख लें ताकि उनका इस्‍तेमाल फिर से किया जा सकें। दूध की बॉटल से लेकर लंगोटी तक साफ करके रख लें। 

2) बच्‍चे की जरूरत का हर सामान जुटा लें : दूसरे बच्‍चे को जन्‍म देने से पहले बच्‍चे की जरूरत का हर सामान जुटा लें। जैसे - डाइपर, वाइप्‍स, आदि। इससे आपको बाद में दिक्‍कत नहीं होगी। 

3) क्‍वीक फूड : दूसरे बच्‍चे को जन्‍म देने से पहले घर में स्‍नैक्‍स, इंस्‍टेंट फूड आदि का स्‍टॉक रख लें। इससे बच्‍चे के जन्‍म के दौरान आप बड़े बच्‍चे को फटाक से कुछ बनाकर दे सकती है या बच्‍चे के जन्‍म के बाद तुंरत - तुंरत कुछ बना सकती है। इससे समय की बचत होती है। 

4) टॉय बिन : जिस घर में दो बच्‍चे होंगे वहां खिलौनों की भरमार होगी, इसलिए अपने बेडरूम में टॉय बिन रख लें ताकि बच्‍चा उसी में से खिलौने निकाल कर खुद खेलें और अपने छोटे भाई/बहन को खिलाएं। इस तरह से घर भर में खिलौने नहीं फैलेगें। 

5) सफाई कर लें : दूसरे बच्‍चे के जन्‍म से पहले किड्स रूम को साफ कर लें। इससे नए बच्‍चे को किसी प्रकार का संक्रमण आदि का खतरा नहीं रहेगा। बच्‍चे के कमरे में प्रॉपर हवा आने का प्रबंध भी रखें। 

6) अपने बड़े बच्‍चे को मानसिक रूप से तैयार कर लें : दूसरे बच्‍चे को जन्‍म देने से पहले, बड़े बच्‍चे को समझाएं और उसे आने वाले भाई/बहन के बारे में बताएं। हो सकता है कि वह इस बात से परेशान हो जाएं लेकिन आप उसे प्‍यार से हैंडल कर लें ताकि वह भी दूसरे बच्‍चे के जन्‍म पर खुश हो सकें।