Thursday, 5 December 2013

कामकाजी महिलाओं के लिए सर्दियों का टाइम मैनेजमेंट



सर्दियों का सुहावना मौसम सभी को बहुत लुभाता है, पर इसमें सबसे बडी मुश्किल यह होती है कि दिन बेहद छोटे होते हैं. इससे हमारी दिनचर्या बहुत ज्यादा प्रभावित होती है. ऐसे में कामकाजी महिलाओं के लिए सही ढंग से समय प्रबंधन करना किसी चुनौती से कम नहीं होता. आखिरकार उन्हें ऑफिस से लेकर घर तक की सारी जिम्मेदारियां जो निभानी होती हैं. तो आइये जानने की सर्दियों के मौसम में आप कम समय में काम को कैसे मैनेज करें-

टाइम मैनेजमेंट टिप्स

 1. सुबह आपको देर ना हो इसलिए रात को ही अगले दिन की सारी तैयारी करके रख लें. 

2. पति, बच्चों और खुद के पहनने वाले कपड़े प्रेस करके वार्डरोब में बिलकुल सामने हैंगर में लगाकर रखें. इसके अलावा शूज-सॉक्स, अंडरगारमेंट्स और टॉवल आदि भी रात को ही व्यवस्थित कर लें. 

3. छुट्टी वाले दिन के लिए ज़रूरी कामों की लिस्ट पहले ही बना लें. उस रोज़ अपने सारे काम जल्दी खत्म करने की कोशिश करें. 

 4. अगर किसी से मिलने जाना है तो उसके लिए सुबह का समय निर्धारित करें. 

 5. आज क्या बनेगा सोचने में व्यर्थ समय ना गवाएं. अगर आप चाहें तो इस समस्या से बचने के लिए परिवार के सभी सदस्यों की पसंद का ध्यान में रखते हुए पूरे हफ्ते का मेन्यू तैयार करके उसे किचन में चिपका सकती हैं. इससे आपके लिए खाना बनाना आसान हो जाएगा. 

 6. बच्चे सुबह उठने में देर लगाते हैं, इसलिए रात को उन्हें नौ बजे तक सुला दें और सुबह थोड़ा पहले से ही जगाना शुरू कर दें.




Monday, 2 December 2013

ऑपरेशन के बाद मां की कैसी होनी चाहिये देखभाल



आपको जानकर आश्‍चर्य होगा कि आज भी प्रसवोत्‍तर मातृ मृत्‍यु दर सबसे अधिक है। इस अवधि में महिला को अपने पार्टनर और घर वालों से बातचीत करना चाहिए कि उसे आराम की सख्‍त जरूरत है और परिवारीजनों को भी उसका साथ देना चाहिए ताकि वह शारीरिक और भावनात्‍मक रूप से मजबूत हो सकें। प्रसव के बाद, महिला का शरीर निचुड जाता है, उसके शरीर को दुबारा ताकतवर बनने में समय लग जाता है और ऑपरेशन में यह स्थिति ज्‍यादा गंभीर हो जाती है। ऑपरेशन के बाद लगातार डॉक्‍टर से सम्‍पर्क में बने रहें ताकि वह जल्‍दी से जल्‍दी स्‍वस्‍थ हो पाएं। 

ऑपरेशन से हुए प्रसव के बाद कुछ स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल टिप्‍स निम्‍म प्रकार हैं :

 स्‍टेप : 1 यहां कुछ टिप्‍स दिए जा रहे है जो आपको बच्‍चे के जन्‍म के बाद हॉस्पिटल छोड़ने से पहले ध्‍यान में रखना चाहिए। 

1) ऑपरेशन होने के बाद डॉक्‍टरी सलाह के अनुसार आप धीमे और कम चलें। जहां भी जाना हो, हल्‍के - हल्‍के कदम बढ़ाएं। 

2) डॉक्‍टर की सभी सलाह को ध्‍यान से सुन लें। आप चाहें तो डॉक्‍टर से इसके साइड इफेक्‍ट और बच्‍चे पर होने वाले असर के बारे में भी पूछ सकती हैं। अपने डाइट प्‍लान के बारे में भी सलाह ले लें। 

3) डिलीवरी के बाद लगभग 6 सप्‍ताह तक लगातार ब्‍लीडिंग होती है, इस दौरान आप लगातार पैड चेंज करती रहें, वरना इंफेक्‍शन होने का खतरा रहता है। वैसे हॉस्पिटल पैड देते है लेकिन अगर ऐसी सुविधा नहीं है तो खुद प्रबंध कर लें। 

4) अगर आप बैठना पसंद करती है तो रॉकिंग चेयर पर कुछ समय बिताएं, इससे काफी जल्‍दी रिकवरी होती है और आपको दर्द से भी निजात मिलेगा। 


स्‍टेप : 2 - हॉस्पिटल से घर आने के बाद इन टिप्‍स पर ध्‍यान दें। 

1) धीमे चलें। भारी वजन उठाने की कोशिश न करें। कम से कम 6 सप्‍ताह तक कोई भारी वजन नहीं उठाएं, वरना टांके फूलने और उनमें दर्द होने का ड़र रहता है। अपने स्‍वास्‍थ्‍य पर ध्‍यान दें। 

2) पर्याप्‍त मात्रा में पानी पिएं। अपनी बॉडी को डिहाइड्रेट होने से बचाएं। ज्‍यादा पानी पीने से कब्‍ज की समस्‍या नहीं होती है जिससे आराम रहता है। 

3) घर में ही थोड़ा - थोड़ा टहलें। 

4) ऑपरेशन के बाद बुखार आने पर डॉक्‍टर को दिखा लें। अगर आपको टांकों में भी कोई दर्द होता है तब भी डॉक्‍टर को दिखाएं। 

5) टांकों को कटने तक भीगने से बचाएं। नहाते समय उन पर पानी न पड़ने दें। 

6) ऑपरेशन के 4 सप्‍ताह तक ड्राईविंग करने से बचें। 

7) ऑपरेशन होने के कुछ सप्‍ताह बाद तक सेक्‍स करने से बचें। इस दौरान बच्‍चे को ज्‍यादा से ज्‍यादा समय दें और उसके साथ एक इमोशनल बॉन्‍ड बनाएं। इस तरह आपको भी अच्‍छा लगेगा।




क्‍या आप दूसरे बच्‍चे के लिए तैयार हैं ?



घर में किसी नए सदस्‍य का आना, अपने साथ हजारों खुशियां लाता है। याद है जब आपका पहला बेबी हुआ था, तो घर में सभी लोग बहुत खुश थे, जश्‍न वाला माहौल था। आप जब दूसरे बेबी को जन्‍म देगी तब भी सभी की खुशी का ठिकाना नहीं रहेगा। लेकिन क्‍या आप वाकई में दूसरे बच्‍चे को जन्‍म देने के लिए तैयार हैं। एक बच्‍चे के जन्‍म में पूरे परिवार की राजी, पार्टनर की हामी और पहले बच्‍चे की समझ को बढ़ाना जरूरी होता है। कई बार दूसरे बच्‍चे के जन्‍म के समय पहले बच्‍चे को बहुत तकलीफ होती है क्‍योंकि वह मानसिक रूप से दूसरे भाई/बहन के साथ अपने मम्‍मी - पापा का प्‍यार बांटने के लिए तैयार नहीं होता है। ऐसे में उसे इमोशनली डील करना पड़ता है। वहीं दूसरी बार प्रेग्‍नेंट होने पर आपको घर और बच्‍चे की जिम्‍मेदारी भी किसी को सौपनीं पड़ती है। डिलीवरी के बाद आपको दो बच्‍चों की देखभाल करनी पड़ती है। ऐसे में आपको ज्‍यादा वर्कआउट करना पड़ता है। दूसरे बच्‍चे के लिए प्‍लानिंग करने से पहले हसबैंड और वाइफ को निम्‍म बातों को ध्‍यान में रखना चाहिए :

 - क्‍या आप दूसरे बच्‍चे के लिए तैयार हैं ?

 1) पहले बच्‍चे के सामान को निकाल लें : जब आप दूसरे बच्‍चे की तैयारी में हों, तो पहले बच्‍चे के जन्‍म के दौरान लाया सामान और कपड़ों को निकाल लें और उन्‍हे साफ करके रख लें ताकि उनका इस्‍तेमाल फिर से किया जा सकें। दूध की बॉटल से लेकर लंगोटी तक साफ करके रख लें। 

2) बच्‍चे की जरूरत का हर सामान जुटा लें : दूसरे बच्‍चे को जन्‍म देने से पहले बच्‍चे की जरूरत का हर सामान जुटा लें। जैसे - डाइपर, वाइप्‍स, आदि। इससे आपको बाद में दिक्‍कत नहीं होगी। 

3) क्‍वीक फूड : दूसरे बच्‍चे को जन्‍म देने से पहले घर में स्‍नैक्‍स, इंस्‍टेंट फूड आदि का स्‍टॉक रख लें। इससे बच्‍चे के जन्‍म के दौरान आप बड़े बच्‍चे को फटाक से कुछ बनाकर दे सकती है या बच्‍चे के जन्‍म के बाद तुंरत - तुंरत कुछ बना सकती है। इससे समय की बचत होती है। 

4) टॉय बिन : जिस घर में दो बच्‍चे होंगे वहां खिलौनों की भरमार होगी, इसलिए अपने बेडरूम में टॉय बिन रख लें ताकि बच्‍चा उसी में से खिलौने निकाल कर खुद खेलें और अपने छोटे भाई/बहन को खिलाएं। इस तरह से घर भर में खिलौने नहीं फैलेगें। 

5) सफाई कर लें : दूसरे बच्‍चे के जन्‍म से पहले किड्स रूम को साफ कर लें। इससे नए बच्‍चे को किसी प्रकार का संक्रमण आदि का खतरा नहीं रहेगा। बच्‍चे के कमरे में प्रॉपर हवा आने का प्रबंध भी रखें। 

6) अपने बड़े बच्‍चे को मानसिक रूप से तैयार कर लें : दूसरे बच्‍चे को जन्‍म देने से पहले, बड़े बच्‍चे को समझाएं और उसे आने वाले भाई/बहन के बारे में बताएं। हो सकता है कि वह इस बात से परेशान हो जाएं लेकिन आप उसे प्‍यार से हैंडल कर लें ताकि वह भी दूसरे बच्‍चे के जन्‍म पर खुश हो सकें।




Thursday, 24 October 2013

तोल-मोल के बोल खरीदारी में



मोल-भाव का अपना अलग ही मजा होता है। लोग ऐसा क्यों करते हैं, मोल-भाव करना क्या वाकई फायदेमंद होता है और इसका सही तरीका क्या होना चाहिए, इन्हीं सवालों के जवाब ढूंढने की कोशिश की गई है यहां।
सही दाम बोलो? 'नहीं मैडम, साढ़े पांच सौ रुपये से एक पैसा भी कम नहीं हो सकता।'
'अरे! क्या बात करते हो दो दिन पहले ही मैं यहां से तीन सौ रुपये में बिलकुल ऐसा ही पर्स ले गई थी।'
'नहीं, आपने कहीं और से खरीदा होगा।'
'भइया मैं वर्षो से तुम्हारे यहां से समान खरीदती आ रही हूं, कुछ तो खयाल करो।'
'अच्छा 490 में ले जाओ',
'नहीं, नहीं कम से कम 350 में दे दो',
'अच्छा चलो, न आपकी, न मेरी बात। 450 में ले जाओ।'
'रहने दो, नहीं चाहिए,' यह कहते हुए जब वह युवती आगे बढ़ जाती है तो दुकानदार पीछे से आवाज लगाता है, 'अरे बात तो सुनो मैडम, नाराज क्यों होती हो? चलो आपके कहने पर चार सौ में दे देता हूं।' इस तरह सौदा पक्का हो जाता है। चाहे वह दिल्ली का सरोजिनी नगर मार्केट हो या मुंबई का लिंकिंग रोड, यह दृश्य किसी भी बाजार में आसानी से देखा जा सकता है। इससे खरीदने और बेचने वाले दोनों ही खुश हैं।
खरीदार यह सोचकर ख़ुश है कि उसे साढ़े पांच सौ की चीज चार सौ में मिल गई और दुकानदार यह सोच रहा है कि चलो अच्छा हुआ, 100 रुपये में खरीदकर कम से कम तीन सौ का मुनाफा तो कमाया।
मिलती है बचत की संतुष्टि
हर इंसान यह सोचकर खुश होता है कि मैंने दुकानदार से इतने रुपये कम करवा लिए, लेकिन आपको यह नहीं भूलना चाहिए कि दुकानदार कभी भी नुकसान उठाकर सामान नहीं बेचेगा। मोल-भाव में यकीन रखने वाले लोग निश्चित कीमत वाली दुकानों से सामान खरीदना पसंद नहीं करते क्योंकि वहां से सामान खरीदने के बाद वे 'मैंने 200 रुपये बचा लिए', के सुखद एहसास से वंचित रह जाते हैं। साथ ही ग्राहक हमेशा इस बात को लेकर सचेत रहता है कि मैं ठगा न जाऊं। इसलिए लोग मोल-भाव को अपना जन्मसिद्ध अधिकार मानते हैं। उन्हें दुकानदारों से इस तरह का रोचक और सरस वार्तालाप करना अच्छा लगता है। इस बातचीत का भी अपना अलग ही अंदाज होता है। मोल-भाव करने वाले खरीदार अपने मजबूत इरादे और धैर्य का परिचय देते हुए अपनी बात पर अडिग रहते हैं।
दिल्ली की 42 वर्षीया लता अग्रवाल पेशे से शिक्षिका हैं और वह कहती हैं, 'मैं बार्गेनिंग में माहिर हूं और मुझे ऐसी शॉपिंग करने में बहुत मजा आता है। जब भी मेरी कलीग्स शापिंग के लिए जनपथ या सरोजिनी नगर जाती हैं तो मुझे अपने साथ जरूर ले जाती हैं।'
इस संबंध में मनोवैज्ञानिक डॉ.अशुम गुप्ता कहती हैं, 'हमेशा अपने फायदे के बारे में सोचना सहज मानवीय प्रवृलि है। इसीलिए लोगों को मोल-भाव करना अच्छा लगता है। अब तक किए गए अनुसंधानों से यह साबित हो चुका है कि पुरुषों की तुलना में स्त्रियां ज्यादा अच्छी तरह मोल-भाव करती हैं क्योंकि उन पर गृहस्थी चलाने की जिम्मेदारी होती है और वे हमेशा बचत करना चाहती हैं।'
तसवीर का दूसरा रुख
मोल-भाव के बारे में दुकानदारों का सोचना बिलकुल अलग होता है। दिल्ली के जनपथ मार्केट में टी श‌र्ट्स बेचने वाले संजय नागर कहते हैं, 'मैं पिछले सात वर्षो से यहां दुकान लगा रहा हूं। चाहे हम कितना ही सस्ता सामान क्यों न बेचें, लेकिन ग्राहकों को हमेशा यही महसूस होता है कि हम उनसे ज्यादा कीमत वसूल रहे हैं। वे हमसे दाम कम कराए बिना नहीं मानते। इसीलिए हमें मजबूरी में अपने मुनाफेका मार्जिन रखकर चलना पड़ता है, ताकि हमारे ग्राहकों की बातों का मान भी रह जाए और हमें कोई नुकसान भी न हो। मोल-भाव के बहाने हमारी भी बोरियत दूर हो जाती है और ग्राहकों के साथ अपनत्व भरा रिश्ता कायम होता है। अगर कोई व्यक्ति ज्यादा मोल-भाव नहीं कर पाता तो हमारा फायदा हो जाता है और कभी कोई हमसे कीमत कम करवाने में कामयाब हो जाता है तो हमें उतना फायदा नहीं हो पाता। फिर भी हमारे मुनाफेका बैलेंस बना रहता है। वैसे, लेडीज बहुत ज्यादा बार्गेनिंग करती हैं। इसलिए हम उन्हें पहले से ही ज्यादा कीमत बताते हैं।'
विशेषज्ञ की राय
अच्छी तरह मोल-भाव कर पाना हर इंसान के वश की बात नहीं है, क्योंकि यह सामाजिक व्यवहार का बहुत अहम हिस्सा है। इस संबंध में दिल्ली विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ होम इकोनॉमिक्स की डायरेक्टर डॉ. कुमुद खन्ना आपको दे रही हैं, कुछ सुझाव।
1. मोल-भाव करने का पहला उसूल है कि आपकी बातचीत की शैली बेहद प्रभावशाली और अपनत्व भरी होनी चाहिए। तभी आप दुकानदार से अपनी बात मनवाने में सफल होंगे।
2. दुकानदार ग्राहकों के चेहरे का हाव-भाव पढ़ने की कला में माहिर होते हैं। इसलिए कोई भी सामान खरीदते समय दुकानदार के सामने यह जाहिर न होने दें कि कोई खास चीज आपको बहुत ज्यादा पसंद आ गई है या इसी चीज को आप बहुत देर से तलाश रहे थे। ऐसे में दुकानदार आपकी जरूरत का फायदा उठाते हुए उसकी कीमत कम नहीं करेगा। 3. मोल-भाव का सारा मामला इस बात पर टिका होता है कि किसके पास ज्यादा धैर्य है, अगर आपने किसी चीज की कीमत कम करने को कहा है तो कुछ देर तक अपनी बात पर टिके रहें। इससे दुकानदार खुद कीमत घटाने लगेगा।
4. जिन दुकानों में मोल-भाव होता है, वहां अकसर ठगे जाने का भी खतरा रहता है। इसलिए ऐसी मार्केट से खरीदारी करते वक्त सामान की क्वॉलिटी और एक्सपायरी डेट आदि का पूरा ध्यान रखें और बहुत जांच-परख कर सामान खरीदें।
5. आप सचमुच जितनी कीमत पर सामान खरीदना चाहते हैं, दुकानदार से उससे भी थोड़ी कम कीमत में सामान देने को कहें क्योंकि आप जितने मूल्य पर सामान की मांग करेंगे, दुकानदार उस कीमत पर कभी भी सामान बेचना नहीं चाहेगा। इस तरह दुकानदार जब अपने निर्धारित मूल्य से थोड़ा नीचे आएगा और आप भी अपने लिए मांगी गई कीमत से थोड़ा ऊपर आएंगे तो तभी बीच में एक ऐसी अवस्था आती है, जब एक निश्चित कीमत पर दुकानदार और खरीदार दोनों की सहमति हो जाती है।
6. मोल-भाव वाले बाजारों में भीड़ बहुत ज्यादा होती है, अत: वहां सही समय पर पहुंचने की कोशिश करें, इससे आप तसल्ली से अच्छे सामान का चुनाव कर पाएंगे। इसका एक फायदा यह भी होता है कि आम तौर पर दुकानदार अपने पहले ग्राहक को कभी भी वापस नहीं लौटाते। इसलिए वहां मोल-भाव करने पर आपको मनचाही कीमत पर सामान मिल सकता है।
7. अगर संभव हो तो शॉपिंग के लिए अपने साथ किसी ऐसे दोस्त या रिश्तेदार को लेकर जाएं, जो मोल-भाव की कला में माहिर हो।
8. आप शॉपिंग के शौकीन हैं तो दोस्तों की मदद से अपने लिए ऐसी दुकानें और बाजार तलाशें, जहां मोल-भाव के जरिये अच्छा सामान मिलता हो।
9. बाजार और कीमतों के बारे में जागरूक रहें। अपने परिचितों से इस विषय पर हमेशा बातचीत करें। जब भी कोई सामान खरीदें तो अपनी शॉपिंग के अनुभव दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें। इससे मोल-भाव के संबंध में आपको कई नई जानकारियां मिलेंगी।
10. फिर भी अगर आपको ऐसा लगता है कि आप अच्छी तरह मोल-भाव नहीं कर सकते तो आपको हमेशा फिक्स्ड प्राइस वाली दुकानों से ही सामान खरीदना चाहिए।




Monday, 12 August 2013

खूबसूरती की दुश्मन 9 गलतियां



किसी ने ठीक ही कहा है कि कोई भी परफेक्ट नहीं होता। गलतियां किसी से भी हो सकती हैं। खास तौर पर मेकअप की बात करें तो यह हर किसी के बस की बात नहीं। एक्सपर्ट ही मेकअप को सही अंजाम दे सकते हैं। लेकिन राजमर्रा तैयार होने के लिए पार्लर जाना या ब्यूटीशियन की मदद लेना संभव नहीं है। जल्दबाजी या सही जानकारी के अभाव में छोटी-छोटी गलतियां हो ही जाती हैं। लेकिन सुंदर दिखना आपका हक है। इसलिए आप मेकअप से जुड़ी गलतियों को स्मार्ट तरीके से कैसे सुधारें, 

1. मिस्टेक:

 ब्रॉन्जर ज्यादा लग जाना

 नियम : ब्रॉन्जर पूरे चेहरे पर कभी भी न लगाएं। अगर हलका डस्की लुक देना चाहती हैं तो ब्रॉन्जर के इस्तेमाल से आप गोल्डन गर्ल नजर आएंगी। 

क्या करें : चीक बोंस के नीचे डार्क ब्रॉन्जर लगाएं। थोड़ा सा माथे पर लगाएं। अगर ब्रॉन्जर का हलका शेड आपके पास है तो उसे चीक बोंस के ऊपर और नाक के नीचे की तरफ लगाएं। इस बात का ध्यान रखें कि ब्रॉन्जर स्किन टोन से 2 शेड गहरा हो। 

2. मिस्टेक :

 स्टिकी लिप्स 

नियम : इससे बचने के लिए मेगा शाइन लिप ग्लॉस चुनें।

 क्या करें : अत्यधिक लिप ग्लॉस न लगाएं। अगर यह आपके होंठों से बाहर आने लगे तो इसका मतलब है कि उसे अब दोबारा इस्तेमाल न करें। टिश्यू पेपर को होंठों पर रख कर दबाएं। लिप ग्लॉस का लगाने सही तरीका है होंठों के बीचों बीच लगाकर हलका सा दबाएं। वह अपने आप फैल जाएगा। 

 3. मिस्टेक : 

केकी फेस 

 नियम : जरूरत से अधिक पाउडर का इस्तेमाल न करें। पाउडर बहुत ही अच्छा मेकअप प्रोडक्ट है, लेकिन इसका गलत इस्तेमाल आपके पूरे रूप को बिगाड़ देता है। यह चेहरे को मैट फिनिश लुक देता है और फाउंडेशन को लंबे समय तक टिके रहने में मदद करता है। 

 क्या करें : अगर त्वचा सामान्य और तैलीय है तो पाउडर का इस्तेमाल ब्रश से करें। पहले ब्रश में थोड़ा सा पाउडर लेकर झाड़ दें, फिर जहां जरूरत हो वहीं लगाएं। ख़ास तौर से टी जोन पर लगाएं। अगर त्वचा रूखी है तो आपको पूरे चेहरे पर पाउडर लगाने की कोई जरूरत नहीं है। पाउडर की पतली परत लगाएं। ब्रश के बजाय फ्लैट पाउडर पफ का इस्तेमाल करें। ताकि आप समझ सकें कि कहां अधिक और कहां कम पाउडर का प्रयोग करना है। 

 4. मिस्टेक :

स्पाइडर लैशेज 

 नियम : अगर आपका मस्कारा 3 महीने से अधिक पुराना हो गया है तो उसे अपने मेकअप किट से हटा दें। 

 क्या करें : अगर आप मस्कारा का 2 कोट लगाना चाहती हैं तो जैसे ही पहला कोट सूखे दूसरा लगाएं। जब आप मस्कारा ब्रश को ट्यूब से बाहर निकालती हैं तो अतिरिक्त जमा मस्कारा ट्यूब में वापस डाल दें ताकि बरौनियों में उतना ही लगे जितने में वे प्राकृतिक और स्वाभाविक नजर आएं। 

 5. मिस्टेक:

 बेहद गाढ़ी व काली आइब्रोज

 नियम : अगर आपकी भौंहें बहुत पलती और हलकी हैं तो उन्हें आप आइब्रो पेंसिल से भर सकती हैं लेकिन हलके स्ट्रोक दें और वहीं पेंसिल चलाएं जहां बाल एकदम न के बराबर हों। 

 क्या करें : बा़की भौहों को संवारने के लिए मैट आई शैडो या ब्रो पाउडर का इस्तेमाल करें। अगर आपकी भौहों के बाल का रंग हलका है तो ब्रो पाउडर या शैडो 2 शेड गहरा होना चाहिए। अगर बालों का रंग गहरा है तो ब्रो पाउडर या पेंसिल 1-2 शेड हलकी होनी चाहिए। 

 6. मिस्टेक :


 गलत फाउंडेशन शेड

 नियम : फाउंडेशन चेहरे को टैन लुक नहीं बल्कि स्मूद व परफेक्ट कॉम्प्लेक्शन देने के लिए प्रयोग किया जाता है। इसलिए हमेशा ऐसा फाउंडेशन चुनें जो त्वचा में अच्छी तरह ब्लेंड हो जाए। 

 क्या करें : फाउंडेशन को हाथ में लगाकर टेस्ट करने के बजाय जॉ लाइन पर लगाएं। फिर सही रोशनी में अपना चेहरा देखें। अगर नैचरल दिखे तभी उसे ख़रीदें। ऐसा न हो कि आपका चेहरा एकदम स़फेद नजर आने लगे। 

 7. मिस्टेक : 

रूखी त्वचा पर मेकअप 

 नियम :मेकअप का इस्तेमाल करने से पहले त्वचा को स्वस्थ और कांतिमय बनाना अधिक जरूरी है। रूखी, फटी और बेजान त्वचा पर फाउंडेशन बहुत खराब नजर आता है। 

 क्या करें : रूखेपन को दूर करने के लिए एक्सफोलिएट करें। हेवी ड्यूटी मॉयस्चराइजर लगाएं। जितनी अच्छी और चिकनी आपकी ंत्वचा होगी, फाउंडेशन या मेकअप लगाना उतना ही आसान होगा। रूखी त्वचा वालों को सप्ताह में एक बार एक्सफोलिएट करना चाहिए। 

 8. मिस्टेक

अत्यधिक ब्लशर लगाना

नियम : पहले हलका ब्लश लगाएं। बाद में भले 1-2 स्ट्रोक और दें।

 क्या करें : अपनी त्वचा से 1-2 शेड गहरा ब्लश चुनें। अगर आपकी त्वचा मीडियम टोन है तो हलका पिंक या मीडियम कोरल कलर का ब्लशर चुनें। अगर ब्राइट पिंक इस्तेमाल करेंगी तो गाल अलग से उभरे हुए नजर आंएंगे। पेल पिंक स्मार्ट चयन होगा।

 9. मिस्टेक :

दांतों में लिपस्टिक लग जाना 

 नियम :लिपस्टिक लगाने के बाद हमेशा आईने में देखकर स्माइल करें और अपनी उंगली से दांतों को साफ करें।

 क्या करें : लिपस्टिक हमेशा ब्रश की सहायता से लगाएं। लगाने के बाद अपनी एक उंगली को होंठों के भीतर ले जाकर होंठ अच्छी तरह दबाएं ताकि अतिरिक्त लिपस्टिक आपकी उंगली पर निकल जाए। फिर उंगली बाहर निकाल कर टिश्यू पेपर से दांत साफ करें।




मेहंदी नी मेहंदी



सावन के झूले पड़ चुके हैं। साथ ही शुरू हो चुका है त्योहारों का मौसम यानी हाथों में मेहंदी रचाने और उल्लास में डूब जाने का मौसम आ गया है। युवतियों-नवविवाहिताऔं से लेकर हर उम्र की महिलाओं में मेहंदी का खास क्रेज रहता है। हो भी क्यों न, एक ओर जहां मेहंदी हमारे पारंपरिक श्रंगार में रची-बसी है, वहीं फैशन जगत में भी खिलने लगा है इसका रंग। न सिर्फ मेहंदी की डिजाइन्स में है नयापन, बल्कि इसे लगाने के नए-नए तरीके भी सामने आए हैं।
गुलाब, कमल, मोगरा
बड़े घरानों से लेकर बॉलीवुड सेलेब्रिटीज के हाथों में मेहंदी सजा चुकी मेहंदी आर्टिस्ट वीना नागदा कहती हैं, 'दुल्हन के हाथों में सजाई जाने वाली मेहंदी में गुलाब की डिजाइन काफी लोकप्रिय है। इसके अलावा कमल और मोगरा की डिजाइन भी इन दिनों चलन में है।'
टैटू डिजाइन्स
मेहंदी सिर्फ हाथों या पैरों में ही नहीं रचाई जाती। किशोरियों व युवतियों को मेहंदी से टैटू बनवाना बेहद भाता है। जिन्हें चाहिए रोमांच, वे दुल्हनें नाभि, कमर और शरीर के अन्य हिस्सों पर भी मेहंदी से पति का नाम या दिल का चित्र बनवाने की इच्छा जताती हैं।
पेन मेहंदी
अगर आपको मेहंदी लगाकर घंटों बैठना पसंद नहीं है तो कोई बात नहीं। आप पेन मेहंदी का इस्तेमाल करके भी अपने हाथों पर सुंदर डिजाइन सजा सकती हैं। आजकल बाजार में ऐसे मेहंदी पेन उपलब्ध हैं, जिनसे हाथों पर डिजाइन बनाने पर ऐसा लगता है, मानो आपने मेहंदी रचाई है। पार्टी खत्म होने के बाद आप हाथों को पानी से धोकर आसानी से ये मेहंदी हटा सकती हैं।
ट्रेंडी एंड ट्रेडीशनल
कौन कहता है कि नेल पॉलिश सिर्फ नाखूनों के लिए होती है। इसका एक और इस्तेमाल भी है। मेहंदी के कोन में नेल पॉलिश भरकर हाथों पर सुंदर डिजाइन बनाने का ट्रेंड भी हो चला है लोकप्रिय। इसे जारदोजी मेहंदी कहा जाता है। मेहंदी की डिजाइन बनाकर उस पर ग्लिटर व लिबास से मैच करते स्टोन्स लगाए जाते हैं। इससे मेहंदी की शोभा बढ़ जाती है। परंपरागत डिजाइन्स भी इन दिनों कुछ कम लोकप्रिय नहीं है। इस मामले में टॉप पर है जोधपुरी मेहंदी। दुल्हनों व नवविवाहिताओं को खूब भाते हैं पारंपरिक प्रतीक जैसे दूल्हा-दुल्हन के चेहरे, मयूर व आम की पत्तियां इत्यादि। वहीं कुछ युवतियों को मेहंदी की ऐसी डिजाइन पसंद आती है जिसमें किसी भी तरह के फिगर्स नहीं होते। अंगुलियों के पोर को मेहंदी से भरा जाए, यह भी जरूरी नहीं होता।
अरेबिक डिजाइन
सिंपल और ट्रेंडी लुक के कारण अरेबिक डिजाइन इन दिनों युवतियों के बीच बेहद लोकप्रिय है। वहीं परंपरागत भारतीय डिजाइंस से कुछ हटकर पसंद करने वाली दुल्हनों व नवविवाहिताओं को भी ये पसंद आती है।




Monday, 29 July 2013

Increase Power of Your Bones, Muscles, and Joints with Yoga



1. The physical benefits of yoga are countless. Yoga keeps your body strong, as it involves all the muscles in your body to hold and balance yoga asanas (poses). Your feet, legs, hands, abdominals, lower back, legs, and shoulders are strengthen through various yoga postures. 2. Yoga's stretching and breathing exercises improve your flexibility, helping joints, tendons, and muscles stay limber. People suffering from osteoarthritis or rheumatoid arthritis will see a noticeable improvement in their stiffness, pain, and other arthritic symptoms by practicing yoga poses and postures. 3. Yoga improves your endurance, especially the more athletic forms of yoga such as ashtanga yoga, power yoga, vinyasa yoga, and Bikram yoga. These rigorous yoga practices follow a specific sequence of poses (asanas) that become more challenging as you progress. Unlike the more gentle hatha yoga, the forms of ashtagna yoga, power yoga, vinyasa yoga, and Bikram yoga require you to keep your body in constant motion between poses, resulting in a strenuous cardiovascular workout and improved core strength. 4. Hatha yoga can relieve chronic back and neck pain, since the poses and postures gently stretch and strengthen your back and neck muscles. 5. Yoga is often prescribed to help heal various injuries including repetitive strain injuries, knee and back injuries, pulled hamstrings and even minor skin burns. But you should consult your physician before using yoga as a treatment for any injury. 6. Yoga is an excellent weight-bearing exercise that can improve your bone density. This is particularly beneficial for women approaching menopause, since yoga can help ward off osteoporosis, or thinning of the bone.