आज की दुनिया में काम ही है आपकी पहचान। कई बार बेहद मेहनती होने के बावजूद ऑफिस में अटकने लगती है गाड़ी, पहचानें इसकी वजह और कॅरियर को दें रफ्तार..
नमिता सिंह चौधरी ने जब एक मल्टीनेशनल कंपनी जॉएन की, तब वह बहुत खुश थी, लेकिन समय बीतने के साथ ही उसके काम में कुछ बाधाएं भी आने लगीं। कारण था उसके ऑफिस के कुछ सहकर्मियों का असहयोग। इस वजह से नमिता को कार्यालय में काम करने में उतना उत्साह और आनंद और नहीं मिल रहा था, जितना कि उसे पहले मिला करता था। कारपोरेट काउंसलर्स के अनुसार कुछ बातों पर अमलकर आप इस स्थिति से उबर सकती है।
मुस्कराहट से दिन की शुरुआत
दिन की शुरुआत मुस्कराते हुए इस संकल्प के साथ करे कि मुझे आज कुछ रचनात्मक कार्यो को पूर्ण करना है। मुझे विश्वास है कि सफलता जरूर मिलेगी। जब आपका इस तरह का जज्बा होगा तो आपको आगे बढ़ने से भला कौन रोक सकता है..।
सहकर्मियों से मिलें
कार्यस्थल पर पहुंचकर अपने सहकर्मियों से गर्मजोशी व प्रेम के साथ मिलें। उनके साथ कार्य संबंधी दिनभर की योजनाएं व लक्ष्यों को निर्धारित करे। आपस में बात करने से कार्य संबंधी तनाव कम हो जाता है।
समाधान पर जोर
किसी समस्या पर परेशान होने से बेहतर है कि उस समस्या के समाधान पर विचार करे। कार्य संबंधी किसी समस्या के संदर्भ में नकारात्मक या निराशावादी सोच बैक्टीरिया की तरह संक्रामक होती है। इसलिए इससे बचें।
जब हो अधिक बोझ
कभी-कभी कामकाजी महिलाओं पर काम का अधिक बोझ पड़ जाता है। हालांकि यह स्थिति स्थायी नहीं होती। मान लें कि कोई सहकर्मी बीमार पड़ गया है तो इस स्थिति में आपको अतिरिक्त कार्य करना पड़ सकता है। इस अतिरिक्त जिम्मेदारी से मुंह न मोड़े। जब आप अतिरिक्त दायित्व को पूरा करती हैं तो आपका आत्मविश्वास भी बढ़ता है।
विचार प्रकट करे
अगर आफिस में किसी कार्य या घटना पर बातचीत चल रही है और उस संदर्भ में अन्य लोग आपकी राय जानना चाहते हैं तो अपने विचार अवश्य प्रकट करें। संभव है कि आपकी राय उस कार्य या योजना को और भी अच्छी तरह पूर्ण कर दे। हो सकता है बॉस को भी आपके सार्थक सुझाव पसंद आ जाएं।
जानकारी बढ़ाएं
अपने कार्यक्षेत्र से संबंधित जानकारी का दायरा बढ़ाएं। आप जिस जॉब को कर रही है, उसमें क्या-क्या नवीन परिवर्तन हो रहे है, इस बाबत सजग रहे। ऐसा करने से आपको अपने कार्यक्षेत्र में सहजतापूर्वक कार्य करने और कॅरियर में आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।
प्राथमिकताओं का निर्धारण
कार्य और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच एक संतुलन स्थापित करने का प्रयास करे। यह स्थिति तभी हासिल कर सकेंगी, जब आप घर व परिवार की प्राथमिकताओं के बीच प्राथमिकताओं का निर्धारण कर सकेंगी। कहने का आशय यह है कि जैसे आपके ऑफिस की बैठक का अपना महत्व है, वैसे ही रात में पति व बच्चों के साथ डिनर लेना या उनके बीच वक्त गुजारने का अपना महत्व है
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छवि का ध्यान
एक बार जब दफ्तर में आपकी छवि एक परिश्रमी व सूझबूझ वाले कर्मी की बन गयी है तो इसे आगे भी बरकरार रखना आपका दायित्व है। यदि आपके कार्यस्थल में ड्रेस कोड लागू है तो उसका पालन करे। आपके परिधान शालीन होने चाहिए। भड़काऊ परिधानों से दूर रहे।
आपके जो मित्र है, उनसे तो मित्रता मजबूत करते ही रहे। इसके साथ ही मित्रों और शुभचिंतकों की संख्या में इजाफा भी करे। आज का युग संपर्को का युग है। कारोबार में हर सफल शख्स संपर्को की नेटवर्किग या संजाल बनाकर चलता है। इससे आपके आत्मविश्वास में भी इजाफा होगा।
रहें इनसे दूर
अहंकार, नकारात्मकता, काम के प्रति उदासीनता, भय या आशंका की प्रवृलि के कारण अच्छे से अच्छा संस्थान भी अपनी प्रतिष्ठा खो देता है। वहीं कर्मचारियों को भी संतुष्टि नहीं मिलती। वे अपनी जॉब को भार समझकर करते हैं। इसलिए उपर्युक्त कारकों से दूर रहना ही बेहतर है।

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